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भगवान श्री परशुराम का जन्म और जीवन

भगवान परशुराम हिन्दू पौराणिक कथाओं में एक महत्वपूर्ण अवतार हैं, जिनका जन्म बहुत प्राचीन काल में हुआ था। उनके जीवन और कथाएँ निम्नलिखित हैं:

जन्म: भगवान परशुराम का जन्म राजर्षि जमदग्नि और ऋषिकुल कन्या रेणुका के घर में हुआ था। परशुराम का जन्म उनके पिता जमदग्नि के तप के फलस्वरूप हुआ था और वे भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं।भगवान परशुराम के माता-पिता के नाम ज्ञात त्रितीय के पुत्र और जमदग्नि ऋषि की पत्नी कर्तवीर्य अर्जुन और ऋषि जमदग्नि थे।

जीवन: परशुराम ने अपने जीवन में कई महत्वपूर्ण कार्य किए और कई योद्धाओं को पराजित किया। उन्होंने अपने पिता की इच्छा पर कई बार विश्वामित्र, वशिष्ठ, और अन्य ऋषियों के द्वारा बनाए गए तपोवनों को भंग किया और ऋषियों के समाज में ब्राह्मण जाति के आदर्श का पालन किया।

भगवान परशुराम की सबसे प्रसिद्ध कथा में से एक है उनकी माता की इच्छा पर किया गया मातृहत्या काण्ड है, जिसमें उन्होंने अपने माता के आदर्श के लिए अपने अपने ही माता और उसके सहायकों को मार दिया था। इसके पश्चात्तप के बाद, परशुराम ने अपनी शिक्षा दी और ब्राह्मण और क्षत्रियों के बीच समाज को ब्राह्मणों के उच्चतम स्थान की सुरक्षा दिलाई।

भगवान परशुराम के जीवन के अन्य महत्वपूर्ण हिस्से में उनके द्वारका के जाने वाले घरवापसी, बाणलीला और उनके विभिन्न युद्धक्रियाओं का वर्णन होता है। परशुराम को एक अत्यधिक पराक्रमी और धर्मिक ऋषि के रूप में पूजा जाता है, और उनका चरित्र हिन्दू धर्म में महत्वपूर्ण है।

श्रीपरशुराम के कुछ पौराणिक किस्से |

भगवान परशुराम की कई कहानियां हिन्दू पौराणिक ग्रंथों में मिलती हैं, जिनमें उनके महात्म्य, लीलाएं, और उनके युद्ध क्षमताओं का वर्णन होता है। यहां कुछ प्रमुख परशुराम की कहानियाँ हैं:

1.मातृहत्या काण्ड: परशुराम की माता के आदर्श के लिए उन्होंने अपनी माता की मृत्यु कर दी थी, क्योंकि वह एक ब्राह्मण लड़की नहीं थीं और उसके साथी ऋषिगण उसे गलत दिशा में भगवानों की पूजा करने भेज देते थे। यह कथा परशुराम के निष्कलंक आज्ञान और उनके श्रद्धा भरे भक्ति का प्रतीक है।

2.कार्तवीर्यार्जुन संहार: परशुराम ने महान योद्धा कार्तवीर्यार्जुन को उनके अधर्मिक आचरण के लिए मार डाला था। इसके बाद वे उनके सैन्य को संहार करने के बाद भगवान दत्तात्रेय के पास गए थे और उनसे आपकीचक्र और ब्रह्मास्त्र की राह चाही थी।

3.दण्डक वन गमन: परशुराम ने अपने तपस्या के दौरान दण्डक वन में गुजारे थे, और वहां से वे रामायण काल में राम, लक्ष्मण, और सीता के साथ मिले थे।

4भगवान कृष्ण द्वारा शाप: एक पौराणिक कथा के अनुसार, परशुराम ने भगवान कृष्ण के द्वारका में आकर कुंभसम्भव नामक यादव क्षत्रिय के सजनों को मार दिया था, जिसके परिणामस्वरूप वे शापित हो गए थे कि उनके आने वाले सभी यादव वंश के सदस्य मृत्यु को प्राप्त करेंगे। यह भगवान कृष्ण के महाभारत महाकाव्य के अंत में घटित हुआ था.

परशुराम की कहानियाँ हिन्दू पौराणिक साहित्य में महत्वपूर्ण हैं और उनके जीवन और कार्यों से विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक सिख सिखाई जाती हैं।

सूर्य पुत्र कर्ण के गुरु श्री भगवान परशुराम |

भगवान श्री परशुराम ने कर्ण को धनुर्विद्या का ज्ञान दिया था, और कर्ण उनके शिष्य रहे थे। इसके बावजूद, कर्ण को उसकी असली जाति नहीं पता था और वह अपने जीवन में धन्य के रूप में जाना जाता था।

महाभारत काव्य में, कर्ण को उनके गुरु महर्षि परशुराम द्वारा दिया गया वरदान भी वर्णित किया गया है। परशुराम ने कर्ण को एक शक्तिशाली ब्रह्मास्त्र का ज्ञान दिया था, लेकिन कर्ण ने उस आध्यात्मिक शक्ति का दुरुपयोग किया था, जिसके परिणामस्वरूप उसका वध किया गया था।

यह महाभारत की महत्वपूर्ण कहानी में से एक है और कर्ण के चरित्र में महर्षि परशुराम का महत्वपूर्ण भूमिका है।

ये भी पढ़िए :- आइए हम सब जाने भगवान श्री ऋषि दुर्वासा जी के बारे में….

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