मध्यमेश्वर : पंचकेदार की दूसरी कठिन यात्रा |

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Madmaheshwar Hindu Temple
Madmaheshwar is a Hindu temple dedicated to god Shiva, located in the Mansoona village of Garhwal Himalayas in Uttarakhand,

मध्यमेश्वर और पंचकेदार यात्रा भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है, और यह एक पवित्र और महत्वपूर्ण तीर्थ यात्रा है, जिसे हिन्दू धर्म के अनुयायी विशेष भक्ति से करते हैं। यह यात्रा विशेष रूप से पंचकेदार क्षेत्र में कठिन मानी जाती है, क्योंकि इसमें पांच प्रमुख शिव मंदिरों का दर्शन करने की यात्रा शामिल है।

मध्यमेश्वर और पंचकेदार यात्रा भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है, और य

मध्यमेश्वर: मध्यमेश्वर शिव मंदिर भगवान शिव को समर्पित है और यह पंचकेदार यात्रा के दूसरे स्थल के रूप में आता है।

मध्यमेश्वर एक प्रमुख पिलगांव और पुरातात्विक स्थल है, जो भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है। यह स्थल पंचकेदार यात्रा के एक हिस्से के रूप में महत्वपूर्ण है और भगवान शिव के एक महत्वपूर्ण मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। यहां कुछ महत्वपूर्ण जानकारी है:

  1. मध्यमेश्वर शिव मंदिर: मध्यमेश्वर का मुख्य आकर्षण है मध्यमेश्वर शिव मंदिर, जिसे भगवान शिव के एक रूप के रूप में समर्पित किया गया है। मंदिर का निर्माण हिमालयी शैली में हुआ है और यह आकर्षण के रूप में पर्याप्त महत्व रखता है।
  2. धार्मिक महत्व: मध्यमेश्वर शिव मंदिर को पंचकेदार यात्रा के एक हिस्से के रूप में मान्यता प्राप्त है, और यह तीर्थ स्थल के रूप में बहुत महत्वपूर्ण है। यहां धार्मिक आयोजन और आराधना कार्यक्रम आयोजित होते हैं, जो शिव भक्तों के लिए महत्वपूर्ण होते हैं.
  3. पर्वतीय स्थल: मध्यमेश्वर एक पर्वतीय क्षेत्र में स्थित है और यहां पहुंचने के लिए आपको अद्भुत पर्वतीय दृश्यों का आनंद लेना होगा।
  4. जलवायु: मध्यमेश्वर ठंडा और शीतल जलवायु के साथ एक अच्छा गर्मियों का स्थल है, जिसे यात्रा करने वाले लोग खासा सुखद महसूस करते हैं।
  5. पर्यटन: मध्यमेश्वर पर्यटकों के बीच एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, और यहां आपको आरामदायक स्थानों पर रुकने और खासतर पर्वतीय प्रदेश की सुंदरता का आनंद लेने का मौका मिलता है।

मध्यमेश्वर एक महत्वपूर्ण धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जो पंचकेदार यात्रा के एक महत्वपूर्ण अंश के रूप में जाना जाता है और वहां के आदर्श और शांति की वातावरण का आनंद लेने के लिए एक अच्छा स्थल है।

मध्यमेश्वर की यात्रा किसने शुरू की ?

मध्यमेश्वर की यात्रा का आरंभ

मध्यमेश्वर की यात्रा का आरंभ आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया था। आदि शंकराचार्य, जिन्होंने 8वीं शताब्दी में भारत में धर्मिक और दार्शनिक सिद्धांतों की व्यापक प्रसार किया था, ने भारत के चार धामों की यात्रा (चार धाम यात्रा) के साथ ही पंचकेदार यात्रा को भी प्रस्तुत किया।

पंचकेदार यात्रा में पांच मुख्य शिव मंदिरों का दर्शन किया जाता है, जिनमें मध्यमेश्वर शिव मंदिर भी शामिल है। यह यात्रा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई और धार्मिक मान्यता के हिस्से के रूप में प्रमुख हो गई है, और विशेषकर हिन्दू भक्तों के बीच बड़ी प्रसिद्ध है।

आदि शंकराचार्य ने यह यात्रा उन्होंने भागवती बदरीकेदार यात्रा के साथ आयोजित की और इसके माध्यम से धर्मिक और आध्यात्मिक उन्नति को प्रोत्साहित किया। उन्होंने यात्रा को सात धाम यात्रा के हिस्से के रूप में स्थापित किया और इसके साथ ही पंचकेदार यात्रा को शुरू किया, जिसमें मध्यमेश्वर एक प्रमुख स्थल है।

द्वारा किया गया था। आदि शंकराचार्य, जिन्होंने 8वीं शताब्दी में भारत में धर्मिक और दार्शनिक सिद्धांतों की व्यापक प्रसार किया था, ने भारत के चार धामों की यात्रा (चार धाम यात्रा) के साथ ही पंचकेदार यात्रा को भी प्रस्तुत किया।

पंचकेदार यात्रा में पांच मुख्य शिव मंदिरों का दर्शन किया जाता है, जिनमें मध्यमेश्वर शिव मंदिर भी शामिल है। यह यात्रा आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित की गई और धार्मिक मान्यता के हिस्से के रूप में प्रमुख हो गई है, और विशेषकर हिन्दू भक्तों के बीच बड़ी प्रसिद्ध है।

आदि शंकराचार्य ने यह यात्रा उन्होंने भागवती बदरीकेदार यात्रा के साथ आयोजित की और इसके माध्यम से धर्मिक और आध्यात्मिक उन्नति को प्रोत्साहित किया। उन्होंने यात्रा को सात धाम यात्रा के हिस्से के रूप में स्थापित किया और इसके साथ ही पंचकेदार यात्रा को शुरू किया, जिसमें मध्यमेश्वर एक प्रमुख स्थल है।

मध्यमेश्वर यात्रा कब करे और कैसे जाए ?

मध्यमेश्वर यात्रा भारत के उत्तराखंड राज्य में स्थित है और यहां शिव भक्तों के लिए महत्वपूर्ण है। इस यात्रा को करने के लिए निम्नलिखित कदम जरूरी हो सकते हैं:

  1. यात्रा का समय: मध्यमेश्वर यात्रा को आमतौर पर मई से नवंबर के बीच किया जा सकता है, क्योंकि इस समय पर्वतीय क्षेत्र का मौसम सुहावना होता है। वर्षा के मौसम में यात्रा करने से बचना चाहिए, क्योंकि यह सुरक्षित नहीं हो सकता।
  2. यात्रा की तैयारी: मध्यमेश्वर यात्रा का आयोजन और यात्रा की तैयारी भारी हो सकती है, इसलिए आपको खासकर पर्वतीय क्षेत्रों के लिए तैयार रहना चाहिए। यह मानसिक और भौतिक दृष्टि से तैयार होने का मामूला करना चाहिए, जैसे कि अच्छी चलने के बूट, गर्म कपड़े, पर्वतीय स्थलों के लिए बनाई गई आपूर्ति और खाने पीने की चीजें।
  3. रास्ता और पहुँच: मध्यमेश्वर पहुँचने के लिए आपको उत्तराखंड के ऋषिकेश, हरिद्वार या देहरादून पहुँचना होगा। इसके बाद, आपको पर्वतीय सड़कों का सही से सावधानीपूर्वक अनुसरण करना होगा। यह साहसिक ट्रेक आपको लंबी दूरी, उच्च ऊंचाई वाले घास के मैदान, झरने, अल्पाइन पेड़ों की नालों और आकर्षक अभयारण्य क्षेत्र में ले जाता है। 1-2 दिवसीय ट्रेक उखीमठ गांव से शुरू होता है और घने जंगलों और गंगा नदी के किनारे शांत गांवों के माध्यम से लगभग 14.5 किमी की ट्रैकिंग की आवश्यकता होती है। यह मार्ग उकीमठ गांव, रांसी, बंटोली से होकर गुजरता है और मध्यमहेश्वर मंदिर पर समाप्त होता है। इसके अलावा, मद्महेश्वर मंदिर से 2 किमी की ट्रैकिंग दूरी पर बूढ़ा मध्यमहेश्वर मंदिर भी है, जहां आप एक छोटी सी झील और केदारनाथ, चौखंबा, पंचुल्ली, नीलकंठ, कामेट, त्रिशूल आदि चोटियों के शानदार दृश्य देख सकते हैं।
  4. मध्यमेश्वर यात्रा: मध्यमेश्वर यात्रा के लिए आपको मध्यमेश्वर शिव मंदिर की ओर बढ़ना होगा, जो पंचकेदार यात्रा का हिस्सा है। मंदिर के दर्शन करने के बाद, आप यात्रा को जारी रख सकते हैं और अन्य पंचकेदार क्षेत्रों की यात्रा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।
  5. स्थानीय परमिट और आवश्यक अनुमतियां: मध्यमेश्वर यात्रा के लिए स्थानीय प्राधिकृतियों और नियमों का पालन करना महत्वपूर्ण है।

ध्यान दें कि पंचकेदार यात्रा खतरनाक हो सकती है और पर्वतीय क्षेत्र में मौसम बदलता रहता है, इसलिए सुरक्षित रहने के लिए सावधान रहना आवश्यक है। यात्रा के आयोजन और तैयारी के बारे में स्थानीय प्राधिकृतियों और स्थानीय पर्वतीय संगठनों से जानकारी प्राप्त करना भी उपयुक्त हो सकता है।

जाने क्या है मध्यमेश्वर की कहानी ? { Know what is the story of Madhyameshwar ?]

मध्यमेश्वर की कहानी महत्वपूर्ण है और यह धार्मिक मान्यताओं और भारतीय पौराणिक कथाओं का हिस्सा है। मध्यमेश्वर नामक स्थल भगवान शिव के एक महत्वपूर्ण मंदिर के रूप में प्रसिद्ध है, और इसकी कहानी पुराणों और स्थानीय लोककथाओं में मिलती है।

जैसे कि पुराणों के अनुसार, यहां की कहानी इस प्रकार है:

  1. मध्यमेश्वर शिव मंदिर: मध्यमेश्वर शिव मंदिर भगवान शिव के एक महत्वपूर्ण शिवलिंग के लिए प्रसिद्ध है। इस मंदिर की महात्म्य कथा के अनुसार, इस स्थल पर देवों और दानवों के मध्य एक महत्वपूर्ण युद्ध का स्थल था।
  2. महाकालरूप मंदिर: मध्यमेश्वर मंदिर के शिवलिंग को “महाकालरूप” कहा जाता है, जिसका अर्थ होता है “महाकाल के रूप में”। इसमें भगवान शिव की उपासना की जाती है और यहां आने वाले भक्त इस शिवलिंग की पूजा करने के लिए आते हैं।
  3. आदि शंकराचार्य का योगदान: मध्यमेश्वर क्षेत्र में आदि शंकराचार्य ने अपने जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बिताया और वहां भगवान शिव की उपासना की। उन्होंने मध्यमेश्वर को एक धार्मिक यात्रा के रूप में स्थापित किया और यह स्थल पंचकेदार यात्रा का भाग बन गया।

इस रूप में, मध्यमेश्वर की कहानी एक मान्यता और आध्यात्मिक धार्मिक स्थल के रूप में महत्वपूर्ण है, और यह भगवान शिव की महात्म्य के साथ जुड़ी हुई है।

पांडवो से क्यों जुडी है मध्यमेश्वर मंदिर ?

मध्यमेश्वर मंदिर को पांडवों से जुड़ी कथा भारतीय पौराणिक और इतिहासिक कथाओं में प्रस्तुत की जाती है।

कथा के अनुसार, पांडवों के महाभारत युद्ध के बाद, जब वे अपने पापों का प्रायश्चित्त करने के लिए केदारनाथ की ओर यात्रा कर रहे थे, तो भगवान शिव ने उन्हें अपनी दिव्य स्वरूप में दिखाई दिया। शिव ने पांडवों को कहा कि उन्हें पर्वत क्षेत्र में चार धामों की यात्रा करनी चाहिए, जिनमें केदारनाथ, तुंगनाथ, रुद्रनाथ, और मध्यमेश्वर शामिल थे। यह पांडवों के पापों का प्रायश्चित्त करने के लिए जरूरी था।

मध्यमेश्वर मंदिर इसी यात्रा का हिस्सा था, और पांडवों ने इसे शिव के दिव्य स्वरूप की पूजा के लिए दर्शन किया था।

मद्महेश्वर मंदिर ट्रेक पर त्वरित विवरण

क्षेत्र: गढ़वाल
अवधि: 1-2 दिन
कठिनाई स्तर: मध्यम
अधिकतम ऊंचाई: 11,450 फीट
सर्वोत्तम समय: अप्रैल से जून और अगस्त से सितंबर
मद्महेश्वर ट्रेक दूरी: 14.5 किमी लगभग
बेस कैंप: रांसी गांव
ट्रेक मूल्य: ₹5,000 लगभग
ट्रेक मार्ग: ऋषिकेश – ऊखीमठ – रांसी गांव – मध्यमहेश्वर
निकटतम हवाई अड्डा: देहरादून में जॉली ग्रांट हवाई अड्डा , निकटतम रेलवे स्टेशन : हरिद्वार ,ऋषिकेश

मद्महेश्वर मंदिर तक ट्रैकिंग किसी पुरस्कृत अनुभव से कम नहीं है जिसे रोमांच चाहने वालों को अवश्य आज़माना चाहिए। जब आप इस रोमांचक ट्रेक के लिए तैयार हों, तो इस मद्महेश्वर मंदिर ट्रेक गाइड को अपने पास रखें और पहाड़ों की अछूती सुंदरता का आनंद लें। और अगर आपको इस गाइड यात्रा से ख़ुशी हुई हो तोह आप इस पोस्ट को लाइक करे |

कुछ तस्वीरे जो मध्यमेश्वर ट्रेक की दौरान आपको देखने के लिए मिलेगा |

Madhyameshwar trekking
madhyameshwar trekking details

Here Is The View Of Starting Trek Of Madmeshwar And Details Of Trekk

Madhyameshwar Trek Images
Bantoli Waterfall at madhyameshwar trekk
art paintings in madhyameshwar trek
small painting in rock of madhyameshwar Temple
madhyameshwar temple
madhyameshwar shani dev temple
Madhyameshwar temple
madhyameshwar temple evening view

A Evening View Of Madmeshwar Temple With Evening Aarti Time .

madhyameshwar temple night view

A Night View Of Madmeshwar Temple After Evening Aarti . Temple Closing By Pujari .

केदारनाथ यात्रा आपको कब और कैसे करनी चाहिए :- https://news.bharatkasankalp.com/wp-admin/post.php?post=1958&action=edit

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